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सोमवार, ३० एप्रिल, २०१२

khuda. . .

हम काफिला इ काफ़िर लिए जा रहे हैं
न गिनो हमें वतनपरस्तोंमें
हम तो गद्दार खुदिसे हुए जा रहे हैं

ऐ खुदा तुझे तेरी खुदाई की कसम
हमें इश्क का वास्ता न दे
हम खड़े बेवफाई इ कगार पर
नफरतों में फ़ना हुए जा रहे हैं

थे कभी हमभी बन्दे तेरे कायनातों के
खुद चले हैं जहन्नुम की राहों पर
कहर का दर नहीं तेरे
हम जलजलों को मिटाए जा रहे हैं

तुने भी चाह होगा लाख हमे
हमें इंकार नहीं
जा तेरी मेहेर्बनियों से अब इकरार नहीं
हम वजूद चाहतों के मिटाए जा रहे हैं

कर लेना हिसाब क़यामत के दिन
यद् रखना जुल्म ओ जहर अपने
हम अश्कों की जुबान अपने सिये जा रहे हैं
कौमुदी

गुरुवार, २९ मार्च, २०१२

फाह

ये फाह हैं| ये फाह हैं||
कोई यहाँ न आह हैं| ये फाह हैं||

अठखेलियाँ करती सदा
खुशियाँ यहाँ ये मस्तियाँ
सदियोंको भी यह चाह हैं|

बढाती जड़ें शाखे घनी
फुले फले यहाँ बिजलियाँ
भविष्य की यह रह हैं|

ले करवटे यहाँ जिंदगी
ये हैं प्रभु की बंदगी
यहाँ हमनवां अल्लाह हैं|

उम्मीद हैं बल हैं यही
इसकी कोई सीमा नहीं
यह शक्ति का वरदान हैं|

यहाँ तू भी मैं और मैं भी तू
बांधे दिलों की डोर हैं
यह प्यार का इक छोर हैं|

इंसानियत का कारवां
बढ़ रहा बढ़ता गया
यह जिंदगी का गाँव हैं|
ये फाह हैं| ये फाह हैं ||
-कौमुदी.
Fah is a Kashmiri word. . . It means the warmth provided by the mother to the baby. . .

बुधवार, २२ फेब्रुवारी, २०१२

इंतजार


मैंने सारे दरवाजे 
बंद कर दिए हैं तुम्हारेलिये 
फिर भी. . .तुम आ जाना 
आ जाना किसी झरोकेसे
सूरज की किरण के साथ 
कोई हल्किसी पवन के साथ 
पता हैं मुझे, 
कोई शलाका ले ही आएगी तुम्हे 
यूँ तो रूह में हो तुम कही 
अब के जीवन में बस जाना 
बस! आ जाना 
परछाईयोंमें अक्स तो देख ही लेती हूँ मै
फिर भी कोई तुम्हे, 
ले ही आएगा परीक्षितके महलमें 
पता हैं तुम सदा से हो वही 
लेकिन कोई आहटभी तो नहीं  
आ जाना एहसासके लिए
मै इंतजार कर रही हूँ 
                    -कौमुदी.